गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण कर्तव्य के रूप में युद्ध लडने के परामर्ष के समर्थन में
अर्जुन को युद्ध ना लडने की दशा में सम्मुख होने वाली अपकीर्ति का वर्णन करते हैं
। एक कीर्तिमान योद्धा को युद्ध से विमुख होने पर मिलने वाला अपयश मृत्यु से भी
अधिक क्लेशकारी होगा । शत्रु तुम्हे कायर कहेंगे और कहेंगे कि मेरी शक्ति से भयभीत
होकर युद्ध नहीं किया । इसलिये हे अर्जुन युद्ध करते वीरगति को प्राप्त होकर
स्वर्ग के भागीदार बनो अथवा विजयी होकर पृथ्वी पर ऐश्वर्य भोग करो ।
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