मंगलवार, 10 मार्च 2015

उपदेश चरण 17

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कर्तव्य के रूप में युद्ध लडने के परामर्ष के समर्थन में अर्जुन को युद्ध ना लडने की दशा में सम्मुख होने वाली अपकीर्ति का वर्णन करते हैं । एक कीर्तिमान योद्धा को युद्ध से विमुख होने पर मिलने वाला अपयश मृत्यु से भी अधिक क्लेशकारी होगा । शत्रु तुम्हे कायर कहेंगे और कहेंगे कि मेरी शक्ति से भयभीत होकर युद्ध नहीं किया । इसलिये हे अर्जुन युद्ध करते वीरगति को प्राप्त होकर स्वर्ग के भागीदार बनो अथवा विजयी होकर पृथ्वी पर ऐश्वर्य भोग करो । 

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