शनिवार, 21 मार्च 2015

कर्म पर अधिकार

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि कर्ता व्यक्ति का केवल कर्म पर अधिकार है । कर्म का फल सदैव विधि के नियंत्रण के अधीन होता है । कर्मफल की अभिलाषा से किया जाने वाला कर्म किसी भी दशा में अ-कर्तापन की स्थिति का नहीं हो सकता है । जबकि कर्म करने की आदर्श विधि अ-कर्तापन होती है । 

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