साँख्य
दर्शन के अनुसार आत्मा अ-क्रियाकारी होती है । इसलिये बंधन अथवा मुक्ति के लिये
आत्मा जिम्मेदार नहीं होती है । शरीर की रचना में प्रयुक्त 24 अवयव –
प्रकृति के 5 मूल तत्व, उन प्रत्येक मूल अवयवों के 5 गुण,
10 इंद्रियाँ,
मस्तिष्क,
बुद्धि,
अहंकार तथा आत्मा । आत्मा के बंधन अथवा मुक्ति के लिये इनमें से बुद्धि अर्थात्
विवेक जिम्मेदार होता है । यदि विवेक आत्मा और प्रकृति के भेद को स्पष्ट विदित
रखता है –
मुक्ति प्रशस्थ होती है । अन्यथा बंधन प्रशस्थ होता है ।
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