गुरु
योगेश्वर श्रीकृष्ण कहते हैं हे अर्जुन इन सभी युद्ध के लिये उपस्थित दोनो पक्ष के योद्धाओं के अंदर आत्मा विद्यमान
है वह अनश्वर है । इस अभेद्य सत्य को कोई क्षति नहीं पहुँचा सकता है । व्याख्याकार कहता है कि ईश्वर भी
इस सत्य को क्षतिग्रस्त नहीं कर सकता है । यह स्वयं सिद्ध सत्य है । धर्म ग्रंथ
केवल इस सत्य के ऊपर आच्छादित असत्य को बताते हैं और उस असत्य को हटाने की विधि
बताते हैं । मूल सत्य की व्याख्या नही सम्भव है । इस रूपों के संसार में यही
गुणात्मक सत्य ही एक मात्र उभयनिष्ठ समता है ।
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