भगवद्गीता
बुधवार, 25 मार्च 2015
मोंह से मुक्त
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि जिस क्षण तुम भ्रमकारक मोंह से मुक्त हो जावोगे तुम एक पूर्ण रूप से बदले हुये स्वरूप में हो जावोगे । आत्मज्ञान की उपलब्धि के उपरांत मनुष्य को किसी भाँति किसी बाह्य ज्ञान की आवश्यकता नहीं रह जाती है ।
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