रविवार, 15 मार्च 2015

विवेक सारथी

यदि जीवन को एक रथ कहा जाय तो विवेक इसका सारथी होता है । इंद्रियाँ रथ के पाँच घोडे हैं, और मस्तिष्क उन घोडों की लगाम की रस्सी है । विवेक मस्तिष्क के माध्यम से सभी इंद्रियों के कार्य को नियंत्रित करता है और साथ ही मस्तिष्क को आत्मज्ञान आत्मसात् करने का पथ प्रशस्थ करता है । विवेक को परम् सत्य की अनुभूति प्रतिपल विदित रहने की दशा में जीवन परम् सत्य की ज्योति से प्रकाशित रहता है । यह स्थिति इस रूप संसार के सृजन के मनतव्य के अनुरूप होती है । विवेक आत्मज्ञान से प्रतिपल प्रकाशित रहे इसके लिये आवश्यक होता है कि विवेक को आच्छादित करने वाली बाधाओं से रक्षित किया जाय । ऐसी दशा सृजित करने पर अहंकार का परम् सत्य में स्वयं विलय हो जावेगा । 

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