गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि वेदों का ज्ञान शक्ति और वैभव पाने में
समर्थ होता है परंतु उस ज्ञान से मुक्ति नहीं मिल सकती है । मुक्ति पाने के लिये
आत्मज्ञान तथा उस आत्मज्ञान के प्रति निष्ठावान होना अनिवार्य होता है । इसलिये हे
अर्जुन अपने को गुणों के प्रभाव से ऊपर उठावो और आत्मज्ञान के लिये एकाग्र करो ।
आत्मा जोकि अज़र है अमर है उसे हम जानते नहीं हैं जबकि उसे जानना ही जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि
होती है । गुरू ने तुलनात्मक अभिव्यक्ति में वेदों के ज्ञान को तालब के जल के समान
सीमित क्षमता का बताया ।
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