रविवार, 22 मार्च 2015

योगावस्था

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि मस्तिष्क को प्रकृतीय गुणों के मोंह से मुक्त कर समभाव में स्थापित कर कार्य करो । समभाव की मस्तिष्क की दशा में किये गये कार्य से जनित होने वाले कर्मफल से मस्तिष्क प्रभावित नहीं होगा । कर्मफल से मस्तिष्क का प्रभावित ना होना योग है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें