गुरू
द्वारा साँख्य, योग व केंद्रित विवेक को बताये जाने पर अर्जुन को यह जानने की सामान्य जिज्ञासा हुई
कि कंचिद
कोई व्यक्ति जिसे साँख्य की स्थिति प्राप्त है वह योग की अवस्था में कार्य करता है
और केंद्रित विवेक की स्थिति में प्रतिपल जीवन जीता है तो उस व्यक्ति का प्रगट में क्या स्वरूप
दीखेगा । अर्जुन ने अपनी यह जिज्ञासा गुरू के समक्ष व्यक्त किया ।
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