बुधवार, 18 मार्च 2015

वैभव तथा मुक्ति

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को वेदों में वर्णित कर्मकाण्ड की क्रियायें जो कि सांसारिक वैभव की प्राप्ति तथा स्वार्थपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति के लिये की जाती हैं की तुलना गीता में वर्णित बुद्धियोग जिसके अनुसरण द्वारा मनुष्य प्रकृतीय मोंह से मुक्ति पाता है करते हुये मुक्ति को अधिक श्रेयस्कर बताया है । 

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