गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को वेदों में वर्णित कर्मकाण्ड की क्रियायें जो कि
सांसारिक वैभव की प्राप्ति तथा स्वार्थपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति के लिये की जाती
हैं की तुलना गीता में वर्णित बुद्धियोग जिसके अनुसरण द्वारा मनुष्य प्रकृतीय मोंह
से मुक्ति पाता है करते हुये मुक्ति को अधिक श्रेयस्कर बताया है ।
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