भगवद्गीता
गुरुवार, 10 दिसंबर 2015
विस्तार : चरण 1
इस संसार की संरचना बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि मैं जल में स्वाद हूँ
,
हे कुंती पुत्र अर्जुन मैं सूर्य और चंद्रमा में प्रकाश हूँ
,
मैं वेदों में अक्षर ओइम् हूँ
,
मैं आकाश में ध्वनि हूँ और मानवों में मानवता हूँ ।
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