शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

रूप संसार की व्याख्या

परम् ब्रम्ह इस रूप संसार का वैयक्तिक स्वामी है । उसकी इस सत्ता में, उसकी आठ वर्गीय निम्नतर प्रकृति जिसे कि क्षेत्र कहा जाता है और उच्चतर प्रकृति आत्मा जिसे कि क्षेत्रज्ञ कहा जाता है. रूप धारण कर फैले हुये हैं । शरीर रूपी क्षेत्र में आत्मा रूपी क्षेत्रज्ञ निवास करता है । इस प्रकार इस रूप संसार के समस्त रूप उस अखण्ड परम् ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति द्वारा निर्मित शरीरों के ढाँचे में उसकी उच्चतर प्रकृति आत्मा के द्वारा शोभित शरीरों के रूप में उस ब्रम्ह की अभिव्यक्ति मात्र हैं जो कि पूर्णतया भिन्न सत्य है । 

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