ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति के तीन गुणों की उत्पत्ति भी गुरू
ब्रम्ह से बताते हैं । निम्नतर प्रकृति इन्ही तीनों गुणों के द्वारा उच्चतर
प्रकृति आत्मा को अपने प्रति मोंह में आसक्त करती है । इस प्रकार यह ब्रम्ह का
अद्भुद विज्ञान है कि वह अपनी ही उच्चतर प्रकृति को अपनी ही निम्नतर प्रकृति के
मोंह में बाँधने के लिये आधार स्वयँ रचे हैं । इन्ही गुणों के प्रभाव द्वारा
स्वतंत्र आत्मा परतंत्र प्रकृति के वश में रहता है ।
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