भगवद्गीता
रविवार, 6 दिसंबर 2015
सीमा निर्धारण
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि प्रत्येक रूपधारी जीव की उत्पत्ति इस प्रकार मुझसे ही सम्भव हुई है । मैं ही इस सृष्टि की उत्पत्ति का मूल हूँ और इसका विलय भी मुझमें ही होता है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें