रविवार, 6 दिसंबर 2015

सीमा निर्धारण

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि प्रत्येक रूपधारी जीव की उत्पत्ति इस प्रकार मुझसे ही सम्भव हुई है । मैं ही इस सृष्टि की उत्पत्ति का मूल हूँ और इसका विलय भी मुझमें ही होता है । 

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