शनिवार, 5 दिसंबर 2015

अपरा में परा स्थापित

आठ वर्गीय निम्नतर प्रकृति द्वारा निर्मित शरीर में उच्चतर प्रकृति आत्मा स्थापित है । यह आत्मा शरीर की इंद्रियों, मस्तिष्क, विवेक का प्रयोग करता है जिससे अहंकार का जन्म होता है । यह अहंकार शरीर के अंगों का प्रयोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति मे करता है । प्रत्येक रूप एक क्षेत्र है जिसका कि आत्मा क्षेत्रज्ञ है । क्षेत्रज्ञ और क्षेत्र की परस्पर क्रिया द्वारा कर्म की उत्पत्ति होती है 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें