गुरू बताये कि मैं जल में व्यप्त उसका स्वाद हूँ, चंद्रमा और सूर्य में विसर्जित होने वाला
प्रकाश हूँ, चारों वेदों में अक्षर ओइम् हूँ, आकाश में ध्वनि हूँ, और मानवो में मानवता हूँ । प्रत्येक उदाहरण
में चिर सत्य ब्रम्ह स्वयं है । जल का चिर सत्य स्वाद, चंद्रमा और सूर्य की पहचान उनका प्रकाश, वेदों में वर्णित अविनाशी सत्य ब्रम्ह है, आकाश की विलक्षणता ध्वनि संचार और मनुष्य
का आकर्षण उसकी मानवता ब्रम्ह स्वयं हैं ।
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