रविवार, 13 दिसंबर 2015

विस्तार चरण 2 की व्याख्या

गुरू ब्रम्ह के व्यापक विस्तार की गणना को आगे बढाते हुये कहे कि पृथ्वी का परिचय उसकी गंध, अग्नि का परिचय उसका तेज, जीव का परिचय उसका प्राण, तपस्वी का परिचय उसकी सरलता, यह सभी मैं स्वयं हूँ । स्मर्णीय है कि समस्त रूपो का सृजन ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति के घटको द्वारा हुआ है जो अपने स्वरूप में ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति आत्मा के सहारे स्थिर है । इन समस्त प्रकृतीय स्वरूपों की पहचान स्वयं ब्रम्ह हैं । 

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