मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

विस्तार चरण 3 की व्याख्या

गुरू ने ब्रम्ह के व्यापक विस्तार की गणना में इस श्लोक में उदाहरणों को बताकर यह उपदेश किये हैं कि यह रूप संसार जोकि ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति द्वारा बना है और ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति के अवलम्ब पर स्थिर है की निरंतरता ब्रम्ह स्वयँ साधते हैं । 
  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें