बुधवार, 16 दिसंबर 2015

विस्तार चरण 4

ब्रम्ह के व्यापक विस्तार को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कहे कि मेरे वीर योद्धा अर्जुन मैं बलवान का बल हूँ, मैं इच्छा और संचय की कामना से परे हूँ, जीवों में ज्ञान प्राप्ति की चेतना मैं हूँ  

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