भगवद्गीता
बुधवार, 16 दिसंबर 2015
विस्तार चरण 4
ब्रम्ह के व्यापक विस्तार को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कहे कि
मेरे वीर योद्धा अर्जुन
मैं बलवान का बल हूँ
,
मैं इच्छा और संचय की कामना से परे हूँ
,
जीवों में ज्ञान प्राप्ति की चेतना मैं हूँ
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें