भगवद्गीता
शनिवार, 12 दिसंबर 2015
विस्तार चरण 2
ब्रम्ह के व्यापक विस्तार को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि मैं पृथ्वी में गंध हूँ
,
मैं अग्नि में तेज हूँ
,
समस्त जीवों में प्राण हूँ और तपस्वी की सरलता हूँ ।
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