सोमवार, 21 दिसंबर 2015

अनभिज्ञता का वृतांत

गुरू यह दु:ख व्यक्त किये कि संसार ब्रम्ह को जानता नहीं है । ब्रम्ह जो कि सदा विद्यमान रहने वाला है, शुद्ध है, स्वतंत्र है, जिसे किसी विशिष्ट गुण द्वारा निरूपित नहीं किया जा सकता है और जिसे जानने मात्र से समस्त दुर्वृत्तियों का अंत हो जाता है । हम संसार के रूपों को देखते हैं परंतु हम उस सत्य को नहीं देख पाते हैं जिससे इन समस्त रूपों की उत्पत्ति हुई है । 

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