भगवद्गीता
शनिवार, 8 अक्टूबर 2016
रूप विस्तार : चरण 1
ब्रम्ह को अधिक सक्षमता से व्यक्त करने वाले रूपों की गणना कराते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि आदित्यों में मैं विष्णू हूँ
,
प्रकाश में मैं चमकता हुआ सूर्य हूँ
,
मरुतों में मैं मारीच हूँ
,
और तारों में मैं चंद्रमा हूँ ।
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