समस्त भू-लोक पर फैला हुआ मानव समाज
जिसमें भाषायें भिन्न है, मान्यतायें भिन्न हैं, वृत्तियाँ भिन्न हैं परंतु इन समस्त
भिन्नताओं के रहते हुये भी यह समस्त एक सूत्र में बँधा हुआ है । गुरू का उपदेश प्रशस्थ
करता है कि इस बंधन का रहस्य यह है कि प्रत्येक का अस्तित्व एक ब्रम्ह
की कृपा पर आधारित है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें