हिंदू धर्म दर्शन में कुबेर को
धन-सम्पत्ति के रूप में जाना जाता है । इन्हे यक्ष के शासक के रूप में जाना जाता
है । स्मरणिय है कि यक्ष को अर्धपावन देवरूप माने जाते है । इन यक्षों की उत्पत्ति
राक्षसों के साथ हुई परंतु सात्विक वृत्ति के होने के कारण इन्हे अर्ध-पावन देवता
के रूप में पूजा भी जाता है ।
एक संदेश
अपने चेतन स्वरूप
के प्रति सचेत होवें । चेतन स्वरूप जो कि सदैव अपने स्वरूप में स्थिर रहता है । आप
चाहे जागृत दशा में हैं अथवा स्वप्न दशा में है अथवा गहरी नीद की दशा में हैं चेतन
स्वरूप सदैव अपने चेतन स्वरूप में ही रहता है । इस चेतन स्वरूप के प्रति निरंतर सचेत रहना
आपकी पूर्णता है ।
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