शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2016

विवेक

यह भी ब्रम्ह की आठ वर्गीय निम्नतर प्रकृति का सातवाँ घटक होता है । यह बाह्य अथवा आंतरिक किसी भी विषय वस्तु के प्रति जागरूकता का मानक होता है । इस विवेक की प्रकृति का निरूपण अथवा अभिव्यक्ति धर्मदर्शन का गूढतम विषय होता है । मनुष्य का उत्कर्ष इस विवेक के प्रखर विकास एवं इसके द्वारा सक्षमता से मस्तिष्क की क्रियाँओं को नियंत्रित करने पर ही निर्भर करता है । 

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