वेदों में वर्णित देवताओं को आदित्य
कहा गया है । गुरू ने पूर्व के उपदेश में जिस तुलनात्मक अभिव्यक्ति का उपदेश किया
था उसकी गणना कराते हुये गुरू ने ब्रम्ह को अधिक सक्षमता से व्यक्त करेने में
विष्णु को आदित्यों में सर्वश्र्ष्ठ अभिव्यक्ति का बताया । इस स्थल पर पुन: स्मरण
कराना विषय के अनुरूप होगा कि ब्रम्ह की जो अद्वितीय महिमा उनके उच्चतर प्रकृति
में है कि वह समस्त रूपों का उद्गम आधार होते हुये भी समस्त से अछूता रहती है ।
इसका परिचय विष्णु में सर्वाधिक देखा जा सकता है ।
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