भगवद्गीता
रविवार, 2 अक्टूबर 2016
गुरू का आशिर्वचन
जिज्ञासु अर्जुन के द्वारा व्यक्त अपने मानसिक प्रश्नों की तुष्टि करते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण बोले हे कुरू श्रेष्ठ अर्जुन मैं तुम्हे अपने दैविक रूपों को बताऊँगा जिन्हे तुम अधिक सरलता से ग्रहण कर सकोगे क्योंकि हमारे विस्तार का कहीं अंत नहीं है ।
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