ब्रम्ह की अद्वितीय प्रतिभा – सभी
रूपोंका आधार होते हुये भी वह किसी रूप में नहीं है, सभी कर्मों का प्रेरक होते हुये भी वह किसी कार्य का कर्ता
नहीं है । ब्रम्ह के इन गुणों को प्रकाश के क्षेत्र में सूर्य प्रगट करता है ।
भू-मण्डल के समस्त रूपों को प्रकाशित करता है, परंतु किसी भी रूप से उसका सम्पर्क नहीं है । भू-मण्डल के
समस्त रूप उस सूर्यसे उर्जा पाते हैं परंतु उस सूर्य का किसी भी रूप से सम्पर्क
नहीं है । ब्रम्ह को निरूपित करने का प्रतीक चमकता सूर्य ।
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