सप्तऋषियों के मण्डल को मरिसि बताया
गया है । इन ऋषियों को प्रकृति के विभिन्न ऊर्जा श्रोतों का नियंत्रक बताया गया है
। इस रूप संसार के सृजन काल में ब्रम्ह ने इन ऋषियों को रूप दिया था और इन्हे रूप
संसार की रचना में अपने सहायक के रूप में प्रयोग किया था । पित्त और अग्नि के मध्य
सम्बंध को भी इसी शब्द द्वारा व्यक्त किया जाता है ।
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