ज्ञानका जिज्ञासु अर्जुन, गुरू
योगेश्वर जो कि स्वयं ब्रम्ह स्वरूप हैं, से उस ब्रम्ह की उस अद्भुद शक्ति को बताने
का आग्रह करना चाहता है अथवा किया है, कि ब्रम्ह किस प्रकार इस रूप संसार के
प्रत्येक रूप को अपनी प्रकृति प्रदान करता है । निर्विवाद रूप से ब्रम्ह की यह
शक्ति अद्भुद है जिसके द्वारा उसने समस्त रूपों को सजीव कर दिया है ।
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