यह हिंदू धर्म के प्राचीनतम संस्करण
के लेख हैं जिन्हे कि वैदिक संस्कृत में प्राचीन भारत में लिपिबद्ध किया गया है ।
इनकी संख्या चार है (1) ऋगवेद (2) यजुर्वेद (3) सामवेद (4) अथर्वेद । इनमें
देवताओं के कृतों को मनुष्य की भाषा में लिखा गया है । इन्हे लिपिबद्ध एवं
श्रेणीबद्ध वेद्व्यास ऋषि ने किया था । ज्ञातव्य है कि भगवद्पुराण में ऋषि
वेद्व्यास को भगवान के 24 अवतारों की गणना में एक बताया गया है । लिपिबद्ध होने से
पूर्व यह श्रुति परम्परा द्वारा गुरू से शिष्य में अंतरण द्वारा संचरित हो रहे थे
। इसलिये वेदांत में इन्हे श्रुति प्रमाण के सम्मानित शब्द द्वारा ही व्यक्त किया जाता
है ।
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