शंकर शब्द की विभक्ति करते हुये
निकाले गये अर्थ बनते हैं (1) अच्छे कर्मों को करने वाले (2) शंसय का निवारण करने
वाले । शिव भगवान को संगीतमय मधुर ध्वनि तरंगो के देवता के रूप में भी जाना जाता
है । भगवद्गीता में ग्रंथ के ग्रंथकार ने गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण के मुखसे “साम”
शब्द से व्यक्ति के आत्मा की ब्रम्ह चेतना में तन्मयता को व्यक्त करनेके लिये किया
है । भगवान शंकर इसी स्थिति के साक्षात् प्रगट रूप प्रतीक हैं ।
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