भगवद्गीता
शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016
रूप विस्तार चरण 2
ब्रम्ह को अधिक सक्षमता से व्यक्त करने वाले रूपों की गणना को और आगे बढाते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि वेदों में मैं सामवेद हूँ
,
देवताओं में मैं इंद्र हूँ
,
इंद्रियों में मैं मस्तिष्क हूँ
,
और प्राणियों में मैं विवेक हूँ ।
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