ब्रम्ह की शरीर से उत्पन्न हुये
असुरों में से कुछ सात्विक वृत्ति के थे उन्हे यक्ष नाम दिया गया और कुछ चीख रहे
थे कि ब्रम्हा को ही “खा जावो” उन्हे राक्षस नाम दिया गया । यक्ष को प्राचीन काल
में जंगलों एवं गाँवो के देवता की मान्यता थी जो कि बाद के समयों में गडे हुये धन
के खज़ाने के देवता के रूप में विस्तृत हुई । राक्षसों को विशाल और बलशाली शरीर के
लिये जाना जाता है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें