इस ब्रम्हाण्ड के समस्त अवयव घटक
यथा पृथवी, समुंद्र, आकाश, सौर मण्डल सभी एक संतुलन के साथ
अपने रूपों में स्थिर हैं । गुरू का उपदेश बताता है कि इन समस्त को यह रूप और संतुलन
ब्रम्ह की कृपा द्वारा मिला है । इसकी स्थिरता भी ब्रम्ह की कृपा पर ही निर्भर है
। अंत समय आने पर इस संतुलन का विध्वंस भी ब्रम्ह में विलय में ही होगा ।
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