ब्रम्ह की आठवर्गीय निम्नतर प्रकृति
का यह एक घटक है ।इसकी उत्पत्ति घर्षण से होती है । इसकी प्रचण्ड ज्वाला अन्य
रूपों को जलाकर भस्म करने में सक्षम होती है । समस्त बलि की ग्रहणकर्ता होती है ।
एक संदेश
अपने चेतन स्वरूप
के प्रति सचेत होवें । चेतन स्वरूप जो कि सदैव अपने स्वरूप में स्थिर रहता है । आप
चाहे जागृत दशा में हैं अथवा स्वप्न दशा में है अथवा गहरी नीद की दशा में हैं चेतन
स्वरूप सदैव अपने चेतन स्वरूप में ही रहता है । इस चेतन स्वरूप के प्रति निरंतर सचेत रहना
आपकी पूर्णता है ।
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