भगवद्गीता
सोमवार, 24 अक्टूबर 2016
रूप विस्तार चरण 3
ब्रम्ह को अधिक सक्षमता से व्यक्त करने वाले रूपों की गणना आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि रूद्रों में मैं शंकर हूँ
,
यक्ष और राक्षसों में मैं कुबेर हूँ
,
वसुओं में मैं अग्नि हूँ
,
पर्वत शिखरों में मैं मेरु हूँ ।
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