समाहित दशा हेतु
आर्हताओं की गणना को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि
एकांत में निवास करता हुआ, अल्प अहार करता हुआ, वाणी, शरीर और मन को
संयम में रखता हुआ और सदा ध्यान और एकाग्रता में लीन रहता हुआ और चैतन्य में शरण
लिये हुये .......सतत्
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