गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

मुक्ति अथवा त्रास-भोग

व्यक्ति मुक्ति अथवा संसारी-त्रास भोग में से किसी एक का चुनाव करने को स्वतंत्र है । यदि मोंह-वश व्यक्ति ऐसा सोचता है कि वह ब्रम्ह की शक्ति के विरुद्ध कार्य कर सकता है तो निश्चय ही उसे सांसारिक-त्रास भोग झेलने ही होंगे । परमात्मा की अवज्ञा अहंकार के कारण होती है । 

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