शनिवार, 9 दिसंबर 2017

ज्ञान के सज्ञान

आचार्य आदि-शन्कर गुरू के उपदेश की व्याख्या करते हुये कहते हैं कि जिस प्रकार व्यक्ति को अपने शरीर को जानने के लिये किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है उसी प्रकार ब्रम्ह जो कि व्यक्ति को आत्मा के रूप में उपलब्ध है को जानने के लिये किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं हैं क्योंकि आत्मा तो उसकी शरीर से भी अधिक नजदीक है । 

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