बुधवार, 27 दिसंबर 2017

प्रयोजन

अज्ञान का निवारण व्यक्ति का प्रथम लक्ष्य होना चाहिये । प्रत्येक जीव का सृजन किसी ईश्वरीय प्रयोजन की पूर्ति के लिये हुआ है । जब तक व्यक्ति का अहंकार प्रधान रहता है तब तक व्यक्ति अपनी इच्छाओं को प्रधान मानता है । परंतु ईश्वर के नियम-विधान का कोई उलन्घन नहीं कर सकता है । ईश्वर के विधान को स्वीकारना और अहंकार का क्षय एक सत्य को दो प्रकार से व्यक्त करना है । 

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