भगवद्गीता
मंगलवार, 5 दिसंबर 2017
आसक्ति से मुक्त
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जिस व्यक्ति का विवेक किसी भी आसक्ति से मुक्त है
,
जिसने अपनी आत्मा को वश में कर लिया है और जिसे कोई इच्छा शेष नहीं है
,
वह सन्यास द्वारा उस सर्वोच्च दशा तक पहुंच जाता है
,
जो सभी प्रकार के कर्म से ऊपर है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें