शनिवार, 2 दिसंबर 2017

स्वभाव धर्म

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि व्यक्ति यदि अपने स्वभाव के अनुरूप कर्म को चाहे उतनी सक्षमता से न भी कर सके जितना कि दूसरे के स्वभाव के अनुरूप कर्म को कर सकता है तो भी उसके अपने स्वभाव के अनुरूप के कर्म को करने से वह किसी पाप का भागीदार नहीं होगा । 

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