रविवार, 3 दिसंबर 2017

प्रकृति स्वभाव

गुरू के उपदेश के अनुसार, जैसा कि तेरहवें अध्याय में था, समस्त कर्मों की कर्ता प्रकृति है, ब्रम्हस्वरूप आत्मा सदैव अकर्ता है । व्यक्ति का स्वभाव उसके पूर्व के कर्मों के अनुरूप होता है । सृष्टि का संचालन कर्म और कर्मफल के सिद्धांत पर प्रकृति द्वारा संचालित हो रहा है । प्रकृति न्याय पर आधारित है । न्यायविरूद्ध कृत पाप है । 

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