भगवद्गीता
बुधवार, 13 दिसंबर 2017
सर्वोत्तम शरण
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि ब्रम्ह के साथ एकाकार होकर और प्रशांतात्मा बनने पर उसे न तो कोई शोक होता है और न कोई इच्छा ही होती है । सब प्राणियों को समान समझता हुआ वह मेरी सर्वोच्च शरण को प्राप्त कर लेता है ।
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