भगवद्गीता
गुरुवार, 28 दिसंबर 2017
शाश्वत् धाम
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण बोले हे भारत (अर्जुन) तुम अपनी समस्त सामर्थ्य को एकाग्र कर उसकी शरण ग्रहण करो । उसी की कृपा से तुम्हे शान्ति और शाश्वत् धाम प्राप्त होगा ।
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