भगवद्गीता
शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017
ज्ञान समर्पण
ज्ञाता अथवा समर्पित पूर्णपुरूष के साथ आत्मज्ञान और आत्मानुभव में एकाकार हो जाता है । ज्ञान और समर्पण दोनो का एक ही लक्ष्य है । ब्रम्ह समाहित का अभिप्राय है कि ब्रम्ह से समर्पित दशा मे निवास
,
उस ब्रम्ह में निवास और उसके तदात्म्य में जीवित रहना है ।
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