मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

चैतन्य स्वरूप

आश्रय ग्रहण करने का सुझाव एवं समर्पण प्राप्त करने की जो विधि गुरू ने उपदेश किया उसका सीधा अभिप्राय है कि ब्रम्ह को अपना चैतन्य स्वरूप अनुभव करो और कर्म को अर्पण का अभिप्राय हुआ कि तुम स्वयं अकर्ता रहो । यह वेदांत का ज्ञान आत्मसात् करने का साक्षात् उपाय गुरू ने उपदेश द्वारा प्रशस्थ किया है । 

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