रविवार, 31 दिसंबर 2017

निर्णय एवं निर्देश

प्रकृति व्यक्ति के सम्मुख तथा इर्द-गिर्द वातावरण सृजित करके अपने निर्णय को प्रगट करती है, जबकि व्यक्ति अपनी इच्छाओं के आलोक में अथवा भावनाओं के वशीभूत अथवा विवेक के अधीन अपने कर्तव्य का निर्णय करता है । गुरू ने उपरोक्त मस्तिष्क की तीनों ही, नामत: इच्छा-भावना-विवेक के प्रति ज्ञान का स्वरूप बता दिया, परन्तु कर्तव्य के निर्णय के लिये स्वयं अर्जुन को कहा । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें