विद्वान सत्यदर्शी शंकर का कहना है कि सत्य के ज्ञान के
जिज्ञासु के लिये जिन गुणों की आवश्यकता हैं वह हैं – सत्य और प्रकृति के मध्य भेद
का स्पष्ट विवेक व दृष्टि, किये जाने वाले दायित्व के कर्मों
के कर्मफल के प्रति जिज्ञासा का ना होना,
आत्म नियंत्रण और सत्य के ज्ञान के लिये प्रबल जिज्ञासा ।
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